गणेश उत्सव के दौरान गणेश जी के पंडाल तो सजते ही हैं ,साथ ही उनकी प्रतिमाएं घर पर भी स्थापित कि जाती हैं |लेकिन इसके कुछ नियम भी तय किया गये हैं जिनका पालन उनको प्रसन्न रखने के लिए करना आवश्यक हैं |कोई भी पूजा श्री गणेश उपासना से प्रारम्भ होता हैं और जब बात गणेश यतस्व कि हो तो भक्तो कि उत्साह देखते ही बनता हैं \इस दौरान गणपति को स्थापित करने और फिर उनको विसर्जित करने कि प्रथा हैं \गणपति उत्सव के दौरान पंडाल या मंदिर में में तो भगवान गणेश जी का खूब सिंदर और ऊँचा प्रतिमाएं सजाई जाती हैं ,इसी के साथ गमेश जी का घर में स्वागत करते हैं |
कैसे करें घर में गणपति को स्थापित
प्रातः स्नान के बाद मंदिर और घर को साफ़ करें |गंगा जल से पवित्र करें |अब मिटटी से बनी गणेश प्रतिमा को विधिवत आसान दें |लाल कपडा या केले के पत्ते का ही आसान दें |घर के मंदिर में गणेश प्रतिमा रखकर कलश स्थापना करें \गणेश जी को नई पिली धोती ,जनेऊ ,आभूषण ,माला इतियादी धारण कराएँ |दूर्वा ,पान ,सुपारी ,इत्र ,दुघ ,दही ,रोली ,सिन्दूर ,पुष्प इतियादी उनको विधिवत पूजन के बाद अर्पित करें |
अक्षत और लाल पुष्प चढ़ाएं |धुप ,अगरबती और घी का दीपक जलाएं |पान के पत्ते पर सुपारी रखकर चढ़ाएं |अब श्री गणेश स्तुति करें |ध्यान रखें कि इस दौरान गणेश जी का मुख पूर्व या उत्तर पूर्व ही होना चाहिए |गणेश जी को पंचामृत से ही स्नान कराएँ \चन्दन ,दूर्वा और मोदक तथा सुपारी अर्पित करें \गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय हैं |गणेश जी कि प्रतिमा के सम्मुख एक ताम्र पात्र में जल और उस फुल के कटोरे में चावल अवश्य रखा हो |अब हरी गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए श्री गणेश पूरण ,स्शस्त्र्नाम,गणेश चालीसा ,संकटनाशन स्तोत्र इत्यादि का पाठ करें |जब तक गणेश आपके घर में रहे ,नित्य हवन और आरती करते रहें |इसमें चुक नहीं होनी चाहिए |
प्रातः स्नान के बाद मंदिर और घर को साफ़ करें |गंगा जल से पवित्र करें |अब मिटटी से बनी गणेश प्रतिमा को विधिवत आसान दें |लाल कपडा या केले के पत्ते का ही आसान दें |घर के मंदिर में गणेश प्रतिमा रखकर कलश स्थापना करें \गणेश जी को नई पिली धोती ,जनेऊ ,आभूषण ,माला इतियादी धारण कराएँ |दूर्वा ,पान ,सुपारी ,इत्र ,दुघ ,दही ,रोली ,सिन्दूर ,पुष्प इतियादी उनको विधिवत पूजन के बाद अर्पित करें |
अक्षत और लाल पुष्प चढ़ाएं |धुप ,अगरबती और घी का दीपक जलाएं |पान के पत्ते पर सुपारी रखकर चढ़ाएं |अब श्री गणेश स्तुति करें |ध्यान रखें कि इस दौरान गणेश जी का मुख पूर्व या उत्तर पूर्व ही होना चाहिए |गणेश जी को पंचामृत से ही स्नान कराएँ \चन्दन ,दूर्वा और मोदक तथा सुपारी अर्पित करें \गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय हैं |गणेश जी कि प्रतिमा के सम्मुख एक ताम्र पात्र में जल और उस फुल के कटोरे में चावल अवश्य रखा हो |अब हरी गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए श्री गणेश पूरण ,स्शस्त्र्नाम,गणेश चालीसा ,संकटनाशन स्तोत्र इत्यादि का पाठ करें |जब तक गणेश आपके घर में रहे ,नित्य हवन और आरती करते रहें |इसमें चुक नहीं होनी चाहिए |
