सच तो यह हैं कि जगह नहीं ,मूड के हिसाब से रंग बदलता हैं गिरगिट




िरगिट के बारे में आम धारणा यह है कि वह जगह और परिवेश के हिसाब से रंग बदलता हैं |यानि जिस जगह बैठा हैं उसी रंग का हो सकता हैं |लेकिन ऐसा नहीं हैं ,सच तो यह हैं कि इसकी वजह शारीरिक प्रक्रिया है |उनका रंग जगह नहीं ,बल्कि मूड के हिसाब से बदलता हैं |इसमें दर ,आकर्मण ,प्रेम जैसे भाव होते हैं |इनकी त्वचा में विशेष कोशिकाएं होती हैं ,जो तापमान के हिसाब से फैलती - सिकुड़ती हैं |शारीर से हार्मोन निकलने पर ये उतेजित हो जाती हैंऔर रंग बदलने लगती हैं |

इन्हें इन्टरमेंडीन ,एशिटीलकोलिन नामक हार्मोन उतेजित करते हैं|गिरगिट कि दुनिया में भर में 200 से ज्यादा प्रजातियाँ हैं ,जिनमें ज्यादातर रंग बदल सकते हैं |दिलचस्प बात यह हैं कि गिरगिट शिकारी के सामने पड़ जाता है तो पिली धारियों के साथ लाल रंग में बदल जाता हैं |बीमार होता हैं तो पिला हो जाता हैं क्यूँकि उसमें रंग बदलने के लिए उर्जा कम होती हैं |

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